Dedicated to 'Sabir' -
कोई तूफ़ान सा गुज़र के आया है,
दिल में सैलाब सा उमड़ के आया है;
यूँ तो बातें कोई भी कह लेता है मगर 'साबिर',
तेरी कलम में जज़्बात सा उमड़ के आया है!!
कोई तूफ़ान सा गुज़र के आया है,
दिल में सैलाब सा उमड़ के आया है;
यूँ तो बातें कोई भी कह लेता है मगर 'साबिर',
तेरी कलम में जज़्बात सा उमड़ के आया है!!
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