Dedicated to 'Maahi'
मायूसी की सर्द रातों में भी,
उम्मीदों के जुगनू ढूंढ लेता है!
ये जहाँ तेरा क्या बिगाड़ेगा 'माही',
तू तो दर्द में भी सुकूं ढूंढ लेता है!!
मायूसी की सर्द रातों में भी,
ये जहाँ तेरा क्या बिगाड़ेगा 'माही',
तू तो दर्द में भी सुकूं ढूंढ लेता है!!
No comments:
Post a Comment